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मार्जन — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 3 प्रश्न

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नित्यकर्म

संध्या वंदन में मार्जन प्राशन और अघमर्षण क्या है

मार्जन = जल छिड़ककर बाह्य शुद्धि ('ॐ आपो हि ष्ठा...' मंत्र से शरीर पर)। प्राशन = जल का आचमन करके आन्तरिक शुद्धि। अघमर्षण = 'ॐ ऋतं च सत्यं च...' मंत्र से पाप नाश — हाथ में जल लेकर, नासिका से लगाकर, पाप बाहर निकालने की भावना से बाईं ओर फेंकें। तीनों = गायत्री जप की तैयारी।

संध्या वंदनमार्जनप्राशन
पुरश्चरण

पुरश्चरण के दौरान अभिषेक क्यों किया जाता है?

पुरश्चरण में अभिषेक (मार्जन): संख्या = तर्पण का 10वाँ। पाँच कारण: देवता का सम्मान-स्नान, साधक-स्थल-मूर्ति शुद्धि, तर्पण-दोष-निवारण, देवता का सान्निध्य, पुरश्चरण की पूर्णता। 'मार्जनं शुद्धिकारकम्' (कुलार्णव)। अभिषेक सामग्री: शिव (दूध-गंगाजल), देवी (मधु-दही), गणपति (पंचामृत)।

अभिषेकमार्जनदेव अभिषेक
मंत्र जप विधि

सवा लाख जप करने के बाद हवन-तर्पण-मार्जन कैसे करें?

हवन: 12,500 (या 108 सरल) + 'स्वाहा' + घी। तर्पण: 1,250 (या 11) + जल। मार्जन: 125 (या 3) + कुश जल। ब्राह्मण भोजन + दान + क्षमा। पूर्णाहुति: नारियल।

सवा लाखहवनतर्पण

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।