विस्तृत उत्तर
किसी भी शक्तिशाली मंत्र या कवच के पाठ से पूर्व, साधक को स्वयं को तैयार करना होता है, ताकि वह पाठ की ऊर्जा को ग्रहण कर सके।
पाठ से पहले निम्नलिखित क्रम में तैयारी करनी चाहिए:
- 1विनियोग: मंत्र शक्ति को विशिष्ट उद्देश्य की ओर निर्देशित करना।
- 2न्यास (करन्यास और हृदयादि न्यास): मंत्र के अक्षरों को शरीर के विभिन्न अंगों पर आरोपित करना।
- 3ध्यान: भगवान महेश्वर के सौम्य रूप का ध्यान करना।





