विस्तृत उत्तर
शारदीय या चैत्र नवरात्रि में भगवती की उपासना का अधिकार प्रत्येक उस श्रद्धालु को है जो आस्तिकता, पूर्ण श्रद्धा और शास्त्र-मर्यादा का कठोरता से पालन करता है।
आध्यात्मिक गुरु स्वामी मुकुंदानंद जी के वचनानुसार, ईश्वरीय उपासना में 'हृदय का भाव कर्मकांड के भौतिक उपकरणों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है' (The heart matters more than the hardware)।
विक्षिप्त, चंचल और अश्रद्धेय मन से सजाई गई स्वर्ण-रजत जटित वेदी भी मात्र एक सजावट है, जबकि पूर्ण समर्पण, वैराग्य और भक्ति के साथ स्थापित एक साधारण मिट्टी का कलश भी ईश्वरीय कृपा और अनंत ऊर्जा का 'पावरहाउस' बन जाता है।





