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विस्तृत उत्तर
न्यास से शिवलिंग पर भगवान शिव के सूक्ष्म, नादमय शरीर का निर्माण होता है।
इस प्रक्रिया में मंत्र की अधिष्ठात्री चेतना और ऊर्जा शिवलिंग के अंग-विशेष पर स्थापित होती है।
यही 'मंत्र प्रवेश' की वास्तविक तांत्रिक विधि है, जिसमें मंत्रों द्वारा एक दिव्य खाका तैयार किया जाता है।
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