विस्तृत उत्तर
असितांग भैरव पूर्व दिशा के दिक्पालक हैं। अतः जप करते समय साधक का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
असितांग भैरव साधना किस दिशा में करनी चाहिए को संदर्भ सहित समझें
असितांग भैरव साधना किस दिशा में करनी चाहिए का सबसे सीधा सार यह है: असितांग भैरव साधना में पूर्व दिशा की ओर मुख करके जप करना चाहिए — वे पूर्व दिशा के दिक्पाल हैं।
साधना विधि और नियम जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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बटुक भैरव साधना किस दिशा में करनी चाहिए?
बटुक भैरव साधना दक्षिण दिशा में मुख करके करनी चाहिए — यह भैरव की दिशा है। उत्तर दिशा वर्जित है।
नमः शिवाय जप के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?
नमः शिवाय जप के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठना चाहिए।
असितांग भैरव किस दिशा के संरक्षक हैं?
असितांग भैरव पूर्व दिशा के संरक्षक (दिक्पाल) हैं — इसीलिए उनकी साधना में जप करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करना चाहिए।
अष्ट भैरवों में असितांग भैरव का क्या स्थान है?
असितांग भैरव अष्ट भैरवों में तृतीय स्थान पर हैं — वे पूर्व दिशा के संरक्षक (दिक्पाल) हैं और ज्ञान, सृजनात्मकता तथा शाप-निवृत्ति से संबंधित हैं।
शवदाह में पुत्र या कर्ता किस दिशा में मुख करके क्रिया करता है?
शवदाह में पुत्र या कर्ता पूर्व दिशा की ओर मुख करके क्रिया करता है।
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