विस्तृत उत्तर
सिद्धि प्राप्त करने के लिए अनुष्ठान को बार-बार दोहराया जाना चाहिए। यह ऊर्जा के सानिध्य और स्थिरता को बढ़ाता है।
एक बार अनुष्ठान करके रुक जाने के बजाय, साधक को कम से कम तीन से पांच बार अनुष्ठान करने का नियम बनाना चाहिए।
इससे नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह से स्थान छोड़ दे और साधक का लाभ स्थायी हो।





