विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत अनुशासन, पवित्रता और संकल्पबद्ध होकर किया जाना चाहिए। पाठ आरंभ करने से पूर्व कुछ विशिष्ट नियमों का पालन अनिवार्य है:
— प्रातःकाल स्नानादि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर, एक शुद्ध आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
— सप्तशती की पुस्तक को भूमि पर नहीं, अपितु एक स्वच्छ काष्ठ (लकड़ी) या तांबे की चौकी (Stand/Plate) पर रखना चाहिए।
— पाठ के दौरान गहरी एकाग्रता और भक्ति बनाए रखनी चाहिए।
— बीच में किसी से वार्तालाप करना, जम्हाई लेना (Yawning), या किसी अध्याय को अधूरा छोड़ना सख्त वर्जित है।
— अध्यायों के आरंभ और अंत में घंटी (Bell) बजाने को अत्यंत शुभ माना जाता है।





