दुर्गा सप्तशती पढ़ने के नियम क्या हैं?
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सप्तशती पाठ के नियम: स्नान के बाद पूर्व/उत्तर दिशा में बैठें। पुस्तक भूमि पर नहीं — काष्ठ/तांबे की चौकी पर रखें। बीच में बात करना, जम्हाई, अधूरा छोड़ना — सख्त वर्जित। अध्याय आरंभ और अंत में घंटी बजाना शुभ।
- 1प्रातःकाल स्नानादि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर, एक शुद्ध आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
- 2सप्तशती की पुस्तक को भूमि पर नहीं, अपितु एक स्वच्छ काष्ठ (लकड़ी) या तांबे की चौकी (Stand/Plate) पर रखना चाहिए।
- 3पाठ के दौरान गहरी एकाग्रता और भक्ति बनाए रखनी चाहिए।
- 4बीच में किसी से वार्तालाप करना, जम्हाई लेना (Yawning), या किसी अध्याय को अधूरा छोड़ना सख्त वर्जित है।
- 5अध्यायों के आरंभ और अंत में घंटी (Bell) बजाने को अत्यंत शुभ माना जाता है।
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दुर्गा सप्तशती
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