विस्तृत उत्तर
व्याकरण और निरुक्त की दृष्टि से 'स्वाहा' शब्द की उत्पत्ति दो प्रकार से मानी गई है:
सु + अहा: इसका अर्थ है 'सही रीति से पहुँचाना' या 'उत्तम हवि'। जिस प्रकार एक रॉकेट किसी उपग्रह को अंतरिक्ष में निर्धारित गंतव्य तक पहुँचाता है, उसी प्रकार 'स्वाहा' वह ध्वनि-ऊर्जा या वाहक (Carrier) है जो भौतिक हविष्य को सूक्ष्म ऊर्जा में बदलकर लक्षित देवता तक सुरक्षित पहुँचाती है।
स्व + हा: 'स्व' का अर्थ है अपना (स्वार्थ) और 'हा' का अर्थ है त्याग करना। अर्थात् आहुति देते समय अपने स्वार्थ, लोभ और अहंकार का पूर्णतः त्याग कर देना ही सच्चा 'स्वाहा' है।





