विस्तृत उत्तर
नवग्रह समिधा (याज्ञवल्क्य):
अर्कः पलाशः खदिरस्त्वपामार्गोऽथ पिप्पलः। उदुम्बरः शमी दूर्वाः कुशाश्च समिधः क्रमात्॥
- 1सूर्य = मदार (अर्क/आक) — रोगनाश
- 2चन्द्र = पलाश (ढाक) — सर्वकार्य सिद्धि
- 3मंगल = खैर (खदिर) — शत्रु विजय
- 4बुध = अपामार्ग (चिड़चिड़ा) — बुद्धि वृद्धि
- 5गुरु = पीपल — सन्तान, ज्ञान
- 6शुक्र = गूलर (उदुम्बर) — स्वर्ग, सौभाग्य
- 7शनि = शमी — पापनाश
- 8राहु = दूर्वा (दूब) — दीर्घायु
- 9केतु = कुश (कुशा) — सर्वमनोरथ सिद्धि
नियम: प्रत्येक ग्रह = उसी की समिधा + ग्रह मंत्र। 108 आहुतियाँ प्रति ग्रह।





