विस्तृत उत्तर
ज्योतिष शास्त्र एवं यज्ञ-मीमांसा के अनुसार, विभिन्न ग्रहों की शांति तथा विशिष्ट फलों की प्राप्ति के लिए अलग-अलग वृक्षों की समिधाओं का विधान किया गया है:
— सूर्य: मदार (आक) — व्याधि एवं समस्त प्रकार के रोगों का नाश
— चन्द्रमा: पलाश (ढाक) — सर्वकामदा, सभी कार्यों एवं अभीष्ट की सिद्धि
— मंगल: खैर (खादिर) — अर्थ (धन) एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति
— बुध: अपामार्ग (चिड़चिड़ा) — अभीष्ट दर्शन, ज्ञान एवं चेष्टा में सफलता
— बृहस्पति: पीपल (अश्वत्थ) — प्रजा (सन्तति) लाभ एवं गुरु कृपा
— शुक्र: गूलर (उदुम्बर) — स्वर्ग एवं परम सुख की प्राप्ति
— शनि: शमी — घोर पापों एवं संकटों का शमन
— राहु: दूर्वा (दूब) — दीर्घायु एवं स्वास्थ्य रक्षण
— केतु: कुशा (कुश) — सभी मनोरथों की सिद्धि एवं दैवीय आघातों से रक्षण





