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विस्तृत उत्तर
ज्योतिष शास्त्र एवं यज्ञ-मीमांसा के अनुसार:
राहु के लिए दूर्वा (दूब) की समिधा का विधान है। इससे दीर्घायु एवं स्वास्थ्य रक्षण होता है।
केतु के लिए कुशा (कुश) की समिधा का विधान है। इससे सभी मनोरथों की सिद्धि एवं दैवीय आघातों से रक्षण होता है।
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