विस्तृत उत्तर
सीताजी की प्रार्थना सुनकर गिरिजा (पार्वती) की मूर्ति ने प्रसन्न होकर मुस्कुराई और सीताजी को वरदान दिया कि तुम्हारा मनोरथ पूर्ण होगा — तुम्हें मनवांछित वर मिलेगा।
बालकाण्ड में कहा — 'मनहिं मनु मंजु' — पार्वतीजी ने हृदय में जानकर सीताजी को वर दिया।
सखियों ने गिरिजा मूर्ति का हिलना देखकर कहा कि देवी प्रसन्न हुईं। सीताजी को बड़ा हर्ष हुआ।
इसके बाद सीताजी ने पार्वतीजी का पुनः स्तुति-पूजन किया और पुष्पवाटिका में श्रीरामजी का दर्शन हुआ — जो पार्वतीजी के वरदान का फल था।





