📖
विस्तृत उत्तर
पौराणिक वर्णनों के अनुसार जब पाशुपतास्त्र प्रकट होता है तो उसका स्वरूप अत्यंत भयानक और विराट होता है। इसके हजारों सिर, हजारों पेट, हजारों भुजाएँ, हजारों जिह्वाएँ और हजारों नेत्र बताए गए हैं। यह अपने मुख से चिंगारियाँ और अग्नि की वर्षा करता हुआ प्रतीत होता है। यह वर्णन इसकी सर्वव्यापी और सर्वनाशी प्रकृति को दर्शाता है। इसका इतना विशाल और भयावह स्वरूप यह बताता है कि इसकी शक्ति असीमित और सर्वत्र व्याप्त है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





