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विस्तृत उत्तर
अनुग्रह सर्ग को सत्त्व और तमप्रधान बताया गया है। ब्रह्माजी ने अर्वाक्स्रोत के बाद अनुग्रह-सर्ग की रचना की और फिर भूतादिकों का सर्ग रचा। नौ सर्गों की गणना में अनुग्रहसर्ग आठवाँ कहा गया है। पाठ में इसे वैकृत सर्गों में गिना गया है, पर इसके आगे कोई अलग विस्तार नहीं दिया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 5, PDF पृष्ठ 29, श्लोक 5-8
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