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विस्तृत उत्तर
पंचपर्वा अविद्या पाँच प्रकार की अविद्या को कहा गया है। जब ब्रह्माजी ने सम्यक विचार किये बिना सृष्टि-रचना का विचार किया, तब मोह ने उन्हें व्याप्त कर लिया। उसी स्वयम्भू से तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र नाम वाली पाँच अविद्याएँ उत्पन्न हुईं। पाठ में इन्हें ही पंचपर्वा अविद्या कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 5, PDF पृष्ठ 29, श्लोक 1-2
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