विस्तृत उत्तर
शिव पुराण में सत्यलोक का वर्णन शिव की लीलाओं के सन्दर्भ में आता है। शिव पुराण (२.१.१५) में स्वयं ब्रह्मा जी कथन करते हैं कि वे भगवान शिव की आज्ञा से सृष्टि की रचना के उद्देश्य से सत्यलोक में निवास कर रहे थे। जब वे सृष्टि करने के इच्छुक हुए तब तमोगुण से युक्त अविद्या के पाँच आवरण उनके समक्ष प्रकट हुए। यह प्रसंग दर्शाता है कि सर्वोच्च लोक में रहते हुए भी सृष्टि के आरम्भ में अज्ञान या माया का सूक्ष्म प्रभाव कार्य करता है जिसे ब्रह्मा जी को अपने तप और शिव-कृपा से पार करना पड़ता है। साथ ही शिव पुराण में कल्प-भेद के कारण तपोलोक से सत्यलोक की दूरी 84,000 योजन भी बताई गई है जो वैष्णव पुराणों से भिन्न है।
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