विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण, भागवत पुराण और अन्य शास्त्रों के कर्म-सिद्धांत के अनुसार जीवात्माओं के गंतव्य उनके त्रिगुण (सत्व, रज, तम) और कर्मों की प्रधानता से तय होते हैं। अतल लोक का त्रिगुण सिद्धांत से प्रत्यक्ष और गहरा संबंध है। जो प्राणी सत्व गुण प्रधान होते हैं वे उच्च लोकों (स्वर्ग, महर्लोक आदि) को प्राप्त करते हैं। जो रजोगुण प्रधान हैं वे पृथ्वी पर लौटते हैं या मध्यम लोकों में जाते हैं। जो तमोगुण प्रधान हैं और जिनमें राजसिक अहंकार भी है वे अतल जैसे अधोलोकों में जाते हैं। अतल लोक का संपूर्ण वातावरण — हाटक रस, मायावी स्त्रियाँ, बल असुर की 96 मायाएं, मिथ्या अहंकार — ये सभी राजसिक-तामसिक गुणों के चरम प्रकटीकरण हैं। अतल लोक रजोगुण और तमोगुण के संयुक्त फल का प्रतिनिधि लोक है।
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