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परमात्मा प्रश्नोत्तरी — 16 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित परमात्मा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 16 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

भीष्म के अनुसार कृष्ण एक होकर भी अनेक कैसे दिखते हैं?

भीष्म ने सूर्य का उदाहरण दिया: जैसे एक सूर्य अनेक आँखों से अनेक दिखता है, वैसे एक कृष्ण अनेक हृदयों में अनेक रूप से जान पड़ते हैं।

कृष्णपरमात्माभीष्म स्तुति
श्रीमद्भागवत

भीष्म के अनुसार कृष्ण नारायण कैसे हैं?

भीष्म के अनुसार कृष्ण साक्षात आदिपुरुष नारायण हैं, जो यदुवंश में छिपकर लीला करते हैं और सबके आत्मा हैं।

कृष्ण नारायणभीष्मपरमात्मा
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह ने कृष्ण को भगवान क्यों माना?

भीष्म ने कृष्ण को भगवान इसलिए माना क्योंकि वे साक्षात नारायण, सबके आदिकारण, सर्वात्मा और अनन्य भक्तों पर कृपा करने वाले परमात्मा हैं।

भीष्मकृष्ण भगवाननारायण
शिव ध्यान

हृदयकमल में शिव का ध्यान कैसे करना चाहिए?

हृदयकमल की कर्णिका में दीपशिखा जैसी आकृति वाले ओंकार नामक परमात्मा का ध्यान करना चाहिए।

हृदयकमलशिव ध्यानदीपशिखा
श्रीमद्भागवत

शुकदेव जी इतने बड़े योगी क्यों माने जाते हैं?

वे समदर्शी, भेदभावरहित, परमात्मा में स्थित और इतनी विरक्त दृष्टि वाले थे कि स्त्री-पुरुष भेद भी नहीं देखते थे।

शुकदेव योगीवैराग्यसमदर्शी
श्रीमद्भागवत

भगवान का अनुभव कैसे होता है?

भागवत श्रवण से प्राप्त ज्ञान-वैराग्ययुक्त भक्ति और प्रेममयी भक्ति से भगवान के तत्त्व का अनुभव होता है।

भगवान अनुभवपरमात्माभक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण में परम सत्य किसे कहा गया है?

परम सत्य उस स्वयंप्रकाश परमात्मा को कहा गया है, जिससे जगत की सृष्टि, स्थिति और लय होते हैं।

परम सत्यपरमात्मासृष्टि
प्रलय

प्रलय के बाद क्या बचता है?

प्रलय के बाद केवल प्रधान यानी प्रकृति और पुरुष रह जाते हैं।

प्रलयप्रधानप्रकृति
शिव तत्त्व

निर्गुण शिव क्या है?

निर्गुण शिव वह अलिंग तत्त्व है जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध और गुणों से रहित है।

निर्गुण शिवअलिंगपरमात्मा
शिव तत्त्व

सदाशिव को परमात्मा क्यों कहा गया है?

क्योंकि सदाशिव को सृष्टि, स्थिति और अंत का कारण तथा ब्रह्मा-विष्णु-शिवरूपात्मक कहा गया है।

सदाशिवपरमात्मासृष्टि
शिव तत्त्व

सदाशिव कौन हैं?

सदाशिव जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और अंत के कारण परमात्मा के रूप में वर्णित हैं।

सदाशिवपरमात्माशिव तत्त्व
लोक

क्षीरोदकशायी विष्णु कौन हैं?

वे हर जीव के हृदय में परमात्मा रूप से स्थित विष्णु हैं।

क्षीरोदकशायी विष्णुपरमात्माहृदय
हवन विधि

हिरण्यगर्भ सूक्त मंत्र का क्या अर्थ है?

हिरण्यगर्भ सूक्त का अर्थ: जो स्वप्रकाशस्वरूप, सृष्टि के पूर्व भी विद्यमान, सम्पूर्ण जगत का एकमात्र स्वामी और पृथ्वी से द्युलोक तक को धारण करने वाले हैं — उस सुखस्वरूप परमात्मा की हविष्य (प्रेम और भक्ति) से उपासना करें।

हिरण्यगर्भ सूक्तमंत्र अर्थपरमात्मा
भक्ति एवं आध्यात्म

आत्मा और परमात्मा में क्या अंतर है?

आत्मा हर जीव का अमर चेतन तत्व है; जीवात्मा माया-बद्ध आत्मा है; परमात्मा सर्वव्यापी ब्रह्म है। अद्वैत वेदांत के अनुसार आत्मा और परमात्मा मूलतः एक ही हैं।

आत्मापरमात्माजीवात्मा
सनातन सिद्धांत

परमात्मा क्या है?

परमात्मा वह सर्वोच्च, सर्वव्यापी और असीमित चेतना है जो तीनों लोकों में व्याप्त है। गीता (15/17) में उसे सबका धारण-पोषण करने वाला अविनाशी ईश्वर कहा गया है। वह सत्-चित्-आनंद स्वरूप है।

परमात्माईश्वरसर्वव्यापी
दर्शन

जीवात्मा और परमात्मा में क्या अंतर है?

मुण्डक उपनिषद (3.1.1): दो पक्षी — जीवात्मा (फल खाता) और परमात्मा (साक्षी)। जीवात्मा = अणु, कर्मबद्ध, माया प्रभावित। परमात्मा = सर्वव्यापक, सर्वज्ञ, माया स्वामी। गीता (15.7): जीव ईश्वर का अंश। अद्वैत: दोनों एक, द्वैत: सदा भिन्न।

जीवात्मापरमात्माअंतर

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।