विस्तृत उत्तर
भगवान का अनुभव भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से जुड़ा है। श्रद्धालु मुनिजन भागवत श्रवण से प्राप्त ज्ञान-वैराग्ययुक्त भक्ति के द्वारा अपने हृदय में परम तत्त्वस्वरूप परमात्मा का अनुभव करते हैं। आगे कहा गया है कि जब भगवान की प्रेममयी भक्ति से संसार की सारी आसक्तियाँ मिट जाती हैं और हृदय आनंद से भर जाता है, तब भगवान के तत्त्व का अनुभव अपने आप होता है। हृदय में आत्मस्वरूप भगवान का साक्षात्कार होते ही हृदय की गांठ टूटती है, सारे संदेह मिटते हैं और कर्मबंधन क्षीण हो जाता है। इसलिए भगवान का अनुभव केवल तर्क से नहीं, बल्कि भागवत श्रवण, ज्ञान-वैराग्ययुक्त भक्ति और आसक्ति-रहित प्रेम से बताया गया है।
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