विस्तृत उत्तर
मृत्योर्मुक्षीय (Mrityor mukshiya): मृत्यु से मुक्त करें (लिबरेट फ्रॉम डेथ)।
माम्रतात् (Ma amritat): 'मा' (नहीं) + 'अमृतात्' (अमरत्व से)। अर्थात् मुझे अमरत्व से दूर न करें, या मुझे मोक्ष प्रदान करें।
'मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्' का क्या अर्थ है को संदर्भ सहित समझें
'मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्' का क्या अर्थ है का सबसे सीधा सार यह है: 'मृत्योर्मुक्षीय' = मृत्यु से मुक्त करें; 'मामृतात्' = 'मा' (नहीं) + 'अमृतात्' (अमरत्व से) — अर्थात् मुझे अमरत्व से दूर न करें, मुझे मोक्ष प्रदान करें।
मंत्र का स्वरूप और अर्थ जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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रावण ने ब्रह्माजी से क्या वरदान माँगा?
रावण ने माँगा — वानर और मनुष्य को छोड़कर किसी के मारे न मरूँ। उसने इन दोनों को तुच्छ समझा। यही भूल उसके अन्त का कारण बनी — भगवान ने मनुष्य रूप में अवतार लिया और वानर सेना से रावण का वध किया।
कपटमुनि (कालकेतु) ने प्रतापभानु को क्या लालच दिया?
कपटमुनि ने तप की महिमा बताकर लालच दिया — 'तप से कुछ भी दुर्लभ नहीं, मुझे सब सिद्ध है।' अमरत्व और अजेयता का लालच देकर राजा को विश्वास में लिया ताकि अपनी छल-योजना पूरी कर सके।
सात चिरंजीवी कौन हैं और अमर क्यों?
सप्त चिरंजीवी: अश्वत्थामा (शाप), बलि (विष्णु वरदान), व्यास (धर्म रक्षा), हनुमान (सीता वरदान), विभीषण (राम वरदान), कृपाचार्य (ब्रह्मा वरदान), परशुराम (कल्कि गुरु)। आठवें मार्कण्डेय (शिव कृपा)। पद्म पुराण श्लोक सहित।
काशी में मणिकर्णिका घाट पर शिव पूजा का क्या विशेष महत्व है?
शिव स्वयं मृतक को तारक मंत्र देते हैं — मोक्ष। अनादि अग्नि कभी नहीं बुझी। पार्वती मणिकुंडल गिरा → नाम। अविमुक्त क्षेत्र — शिव सदा निवास। पितृ तर्पण + शिव पूजा = अत्यंत पुण्य।
सत्यलोक में ब्रह्मा के साथ मोक्ष और महर्लोक से पुनर्जन्म में क्या अंतर है?
जो ऋषि महर्लोक से सत्यलोक पहुँचकर ब्रह्मा के साथ वैकुंठ में प्रवेश करते हैं उन्हें पूर्ण मोक्ष मिलता है। जो नहीं पहुँच पाते वे नई सृष्टि में पुनः सृष्टि चक्र में आते हैं।
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