विस्तृत उत्तर
मृत्योर्मुक्षीय (Mrityor mukshiya): मृत्यु से मुक्त करें (लिबरेट फ्रॉम डेथ)।
माम्रतात् (Ma amritat): 'मा' (नहीं) + 'अमृतात्' (अमरत्व से)। अर्थात् मुझे अमरत्व से दूर न करें, या मुझे मोक्ष प्रदान करें।
'मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्' का क्या अर्थ है को संदर्भ सहित समझें
'मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्' का क्या अर्थ है का सबसे सीधा सार यह है: 'मृत्योर्मुक्षीय' = मृत्यु से मुक्त करें; 'मामृतात्' = 'मा' (नहीं) + 'अमृतात्' (अमरत्व से) — अर्थात् मुझे अमरत्व से दूर न करें, मुझे मोक्ष प्रदान करें।
मंत्र का स्वरूप और अर्थ जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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महामृत्युंजय मंत्र केवल शारीरिक रोग ही नहीं, और क्या ठीक करता है?
महामृत्युंजय मंत्र तीन आध्यात्मिक रोगों से भी मुक्ति देता है: (1) अविद्या, (2) असत्य, (3) षड्रिपु (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर) — यह शारीरिक कायाकल्प, उपचारात्मक ऊर्जा और मोक्ष के लिए अनुशंसित है।
महामृत्युंजय मंत्र का दार्शनिक रहस्य क्या है?
दार्शनिक रहस्य: ककड़ी जैसे पकने पर सहज बेल से अलग होती है — वैसे ही आयु पूर्ण होने पर बिना पीड़ा-भय के सहज मृत्यु की प्रार्थना। यह मृत्यु टालने का नहीं, 'मृत्यु के भय' पर विजय का मंत्र है।
'उर्वारुकमिव बन्धनान्' का क्या अर्थ है?
'उर्वारुकमिव' = ककड़ी की भांति; 'बन्धनान्' = डंठल की कैद से। पका फल जैसे सहज बेल से अलग होता है — वैसे ही सहज मृत्यु की प्रार्थना। साथ ही 'उर्वा' = विशाल रोग, इन प्राणघातक रोगों के बंधन काटना।
'पुष्टिवर्धनम्' का क्या अर्थ है?
'पुष्टि' = जीवन की पूर्णता, उत्तम स्वास्थ्य, प्रचुरता; 'वर्धनम्' = वृद्धि/पोषण करने वाला। 'पुष्टिवर्धनम्' = वह परमसत्ता जो श्रेष्ठ माली की भांति सृष्टि रूपी उद्यान का पोषण और संवर्धन करती है।
'सुगन्धिम्' का क्या अर्थ है?
'सुगन्धिम्' का शाब्दिक अर्थ 'सुगंधित' है — आध्यात्मिक अर्थ में यह भौतिक इत्र नहीं बल्कि वह दैवीय आत्मिक सुगंध है जो ब्रह्मांड और सभी जीवों में व्याप्त शिव की उपस्थिति है।
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