विस्तृत उत्तर
रावण ने ब्रह्माजी से वरदान माँगा कि वानर और मनुष्य — इन दो जातियों को छोड़कर वह किसी के भी मारे न मरे।
चौपाई — 'हम काहू के मरहिं न मारें। बानर मनुज जाति दुइ बारें॥'
इसका अर्थ — वानर और मनुष्य — इन दो जातियोंको छोड़कर हम और किसीके मारे न मरें।
इसमें रावण की घमण्डपूर्ण भूल थी — उसने वानर और मनुष्य को इतना तुच्छ और कमज़ोर समझा कि उनसे रक्षा माँगने की आवश्यकता ही नहीं समझी। यही कारण है कि भगवान विष्णु ने मनुष्य रूप में (श्रीराम) अवतार लिया और वानर सेना (हनुमान, सुग्रीव आदि) की सहायता से रावण का वध किया।
शिवजी ने कहा — 'एवमस्तु तुम्ह बड़ तप कीन्हा। मैं ब्रह्माँ मिलि तेहि बर दीन्हा' — ऐसा ही हो, तुमने बड़ा तप किया है, मैंने और ब्रह्मा ने मिलकर उसे वर दे दिया।





