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पौराणिक ज्ञान📜 पद्म पुराण (51/6-7), महाभारत, रामायण, विष्णु पुराण3 मिनट पठन

सात चिरंजीवी कौन हैं और अमर क्यों?

संक्षिप्त उत्तर

सप्त चिरंजीवी: अश्वत्थामा (शाप), बलि (विष्णु वरदान), व्यास (धर्म रक्षा), हनुमान (सीता वरदान), विभीषण (राम वरदान), कृपाचार्य (ब्रह्मा वरदान), परशुराम (कल्कि गुरु)। आठवें मार्कण्डेय (शिव कृपा)। पद्म पुराण श्लोक सहित।

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विस्तृत उत्तर

हिंदू पुराणों में सात (कुछ मतों में आठ) महापुरुष चिरंजीवी (अमर) माने गए हैं।

प्रसिद्ध श्लोक (पद्म पुराण)

*अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः।

कृपः परशुरामश्चैव सप्तैते चिरंजीविनः॥

सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।

जीवेद्वर्षशतं सोऽपि सर्वव्याधिविवर्जितः॥*

सात चिरंजीवी और अमरत्व का कारण

  1. 1अश्वत्थामा (द्रोणपुत्र) — महाभारत में उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र चलाने के कारण श्रीकृष्ण ने शाप दिया — कल्पांत तक भटकते रहोगे। मस्तक की अमरमणि छीन ली गई।
  1. 1राजा बलि — भक्त प्रह्लाद के वंशज। वामन अवतार को तीनों लोक दान किए। प्रसन्न विष्णु ने उन्हें सुतल लोक का राजा और अमर बनाया, स्वयं उनके द्वारपाल बने।
  1. 1वेदव्यास — पराशर ऋषि और सत्यवती के पुत्र। चारों वेदों का विभाजन, 18 पुराणों, महाभारत और ब्रह्मसूत्र की रचना की। धर्म रक्षा के लिए चिरंजीवी — प्रत्येक द्वापर युग में वेद विभाजन करते हैं।
  1. 1हनुमान — रामभक्त, पवनपुत्र। माता सीता ने अशोक वाटिका में अजर-अमर होने का वरदान दिया। ब्रह्मा जी ने भी अमरत्व दिया। राम ने कहा जब तक पृथ्वी पर राम कथा रहेगी, हनुमान जीवित रहेंगे।
  1. 1विभीषण — रावण के भाई, राम भक्त। श्रीराम ने लंका का राजा बनाया और चिरंजीवी होने का वरदान दिया — जब तक पृथ्वी पर धर्म रहेगा, विभीषण जीवित रहेंगे।
  1. 1कृपाचार्य — कुलगुरु, महाभारत के योद्धा। ब्रह्मा जी के वरदान से चिरंजीवी — प्रत्येक मन्वंतर में कुलगुरु का कार्य करते हैं।
  1. 1परशुराम — विष्णु के छठे अवतार। चिरंजीवी हैं — कल्कि अवतार के गुरु बनेंगे और कलियुग के अंत में कल्कि को शस्त्र विद्या सिखाएंगे।

आठवें — मार्कण्डेय ऋषि: शिवजी की कठोर तपस्या और महामृत्युंजय मंत्र सिद्धि से चिरंजीवी। यमराज को भी पराजित किया।

अमरत्व के प्रकार

  • अश्वत्थामा, व्यास, कृपाचार्य = युगांतजीवी (वर्तमान चतुर्युगी के अंत तक)
  • बलि, हनुमान, विभीषण, परशुराम, मार्कण्डेय = कल्पांतजीवी (कल्प के अंत तक)

प्रातःस्मरण का फल: श्लोक के अनुसार इन चिरंजीवियों का नित्य स्मरण करने से मनुष्य निरोगी रहता है और शतायु (100 वर्ष) प्राप्त करता है।

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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण (51/6-7), महाभारत, रामायण, विष्णु पुराण
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