विस्तृत उत्तर
हिंदू पुराणों में सात (कुछ मतों में आठ) महापुरुष चिरंजीवी (अमर) माने गए हैं।
प्रसिद्ध श्लोक (पद्म पुराण)
*अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्चैव सप्तैते चिरंजीविनः॥
सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।
जीवेद्वर्षशतं सोऽपि सर्वव्याधिविवर्जितः॥*
सात चिरंजीवी और अमरत्व का कारण
- 1अश्वत्थामा (द्रोणपुत्र) — महाभारत में उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र चलाने के कारण श्रीकृष्ण ने शाप दिया — कल्पांत तक भटकते रहोगे। मस्तक की अमरमणि छीन ली गई।
- 1राजा बलि — भक्त प्रह्लाद के वंशज। वामन अवतार को तीनों लोक दान किए। प्रसन्न विष्णु ने उन्हें सुतल लोक का राजा और अमर बनाया, स्वयं उनके द्वारपाल बने।
- 1वेदव्यास — पराशर ऋषि और सत्यवती के पुत्र। चारों वेदों का विभाजन, 18 पुराणों, महाभारत और ब्रह्मसूत्र की रचना की। धर्म रक्षा के लिए चिरंजीवी — प्रत्येक द्वापर युग में वेद विभाजन करते हैं।
- 1हनुमान — रामभक्त, पवनपुत्र। माता सीता ने अशोक वाटिका में अजर-अमर होने का वरदान दिया। ब्रह्मा जी ने भी अमरत्व दिया। राम ने कहा जब तक पृथ्वी पर राम कथा रहेगी, हनुमान जीवित रहेंगे।
- 1विभीषण — रावण के भाई, राम भक्त। श्रीराम ने लंका का राजा बनाया और चिरंजीवी होने का वरदान दिया — जब तक पृथ्वी पर धर्म रहेगा, विभीषण जीवित रहेंगे।
- 1कृपाचार्य — कुलगुरु, महाभारत के योद्धा। ब्रह्मा जी के वरदान से चिरंजीवी — प्रत्येक मन्वंतर में कुलगुरु का कार्य करते हैं।
- 1परशुराम — विष्णु के छठे अवतार। चिरंजीवी हैं — कल्कि अवतार के गुरु बनेंगे और कलियुग के अंत में कल्कि को शस्त्र विद्या सिखाएंगे।
आठवें — मार्कण्डेय ऋषि: शिवजी की कठोर तपस्या और महामृत्युंजय मंत्र सिद्धि से चिरंजीवी। यमराज को भी पराजित किया।
अमरत्व के प्रकार
- ▸अश्वत्थामा, व्यास, कृपाचार्य = युगांतजीवी (वर्तमान चतुर्युगी के अंत तक)
- ▸बलि, हनुमान, विभीषण, परशुराम, मार्कण्डेय = कल्पांतजीवी (कल्प के अंत तक)
प्रातःस्मरण का फल: श्लोक के अनुसार इन चिरंजीवियों का नित्य स्मरण करने से मनुष्य निरोगी रहता है और शतायु (100 वर्ष) प्राप्त करता है।





