विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा और विष्णु को शिव भक्ति महादेव के वरदान से मिली। महादेव ने दोनों से कहा कि वे उन पर प्रसन्न हैं और वे इच्छित वर माँगें। तब विष्णु ने महेश्वर को प्रणाम करके वर माँगा कि महादेव के प्रति दोनों की सदा दृढ़ भक्ति बनी रहे। महादेव ने ब्रह्मा और विष्णु को अपनी अचल श्रद्धा-भक्ति प्रदान की। इस प्रकार ब्रह्मा और विष्णु को शिवभक्ति किसी अलग तप-विधान से नहीं, बल्कि महादेव की प्रसन्नता और उनके वर से प्राप्त हुई।
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