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विस्तृत उत्तर
सुनन्द, नन्दन, विश्वनन्द और उपनन्दन सद्योजात ब्रह्म के चार शिष्य थे। वे सद्योजात ब्रह्म के समीप प्रकट हुए, श्वेतवर्ण वाले और महायशस्वी कहे गए हैं। पाठ में उनका विशेष गुण यह बताया गया है कि वे महात्मा शिष्य सदैव सद्योजात ब्रह्म की सेवा में तत्पर रहते थे। इसलिए उनकी पहचान सद्योजात शिव की सेवा-परम्परा से जुड़ी है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 11, PDF पृष्ठ 63, श्लोक 6-7
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