विस्तृत उत्तर
सहस्रार चक्र का बीज मंत्र 'ॐ' या मौन है।
यह चक्र मस्तिष्क के शिखर पर स्थित है और परमतत्त्व से संबद्ध है।
इस बीज मंत्र की साधना से समाधि, ब्रह्म-ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति होती है।
सहस्रार चक्र का बीज मंत्र क्या है को संदर्भ सहित समझें
सहस्रार चक्र का बीज मंत्र क्या है का सबसे सीधा सार यह है: सहस्रार चक्र का बीज मंत्र 'ॐ' या मौन है — यह मस्तिष्क के शिखर पर स्थित, परमतत्त्व से संबद्ध है। साधना से समाधि, ब्रह्म-ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति...
चक्र शोधन और कुंडलिनी जागरण जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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शव साधना का परम लक्ष्य क्या है?
शव साधना का परम लक्ष्य मृत्यु के भय का समूल नाश है — साधक अनुभव करता है कि मृत्यु शरीर की है आत्मा की नहीं, और कुंडलिनी जागृत होकर परमशिव से विलय कर मोक्ष प्राप्त होता है।
तंत्र में सहस्रार चक्र तक पहुंचने पर क्या स्थिति होती है?
शिव-शक्ति मिलन = समाधि। निर्विकल्प (द्वैत समाप्त)। अमृत प्रवाह, सहस्र सूर्य प्रकाश, सर्वज्ञता, मोक्ष। अत्यंत दुर्लभ। रामकृष्ण/रमण = उदाहरण।
घर में ताजमहल की तस्वीर लगाना शुभ है या अशुभ?
ताजमहल की तस्वीर घर में अशुभ है — यह मूलतः एक मकबरा (समाधि) है जो मृत्यु और शोक का प्रतीक है। इसकी जगह मंदिर, तीर्थ, झरने या सौम्य देवता की तस्वीरें लगाएँ।
शाक द्वीप में वायु देव की उपासना कैसे होती है?
शाक द्वीप में ऋतव्रत आदि चार वर्ण प्राणायाम और अष्टांग योग द्वारा समाधिस्थ होकर भगवान के वायु स्वरूप (प्राणतत्व) की आराधना करते हैं।
ध्यान और समाधि में क्या भेद है?
ध्यान: 'मैं ध्यान कर रहा' (ध्याता-ध्येय अलग, प्रयास, सीमित)। समाधि: 'मैं' विलय (त्रिपुटी एक, प्रयास-रहित, कालातीत)। योगसूत्र: ध्यान=निरंतर प्रवाह, समाधि=केवल ध्येय शेष। उपमा: ध्यान=तेल धारा, समाधि=नदी-सागर विलय। ध्यान=अभ्यास, समाधि=फल (स्वतः)।
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