विस्तृत उत्तर
योग शास्त्र के अनुसार, मानव शरीर में ऊर्जा के सात प्रमुख केंद्र हैं, जिन्हें चक्र कहा जाता है। प्रत्येक चक्र एक विशिष्ट तत्त्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश आदि) और ऊर्जा-आवृत्ति से जुड़ा है। ये चक्र जब अशुद्ध या असंतुलित होते हैं, तो व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रोगों से ग्रस्त हो जाता है और उसकी आध्यात्मिक प्रगति रुक जाती है।
प्रत्येक चक्र का अपना एक विशिष्ट बीज मंत्र है, जो उस चक्र की ऊर्जा-आवृत्ति से मेल खाता है। यह बीज मंत्र उस चक्र को खोलने की 'कुंजी' है।
जब साधक एकाग्रचित्त होकर किसी चक्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए उसके बीज मंत्र का जप करता है, तो उत्पन्न होने वाली ध्वनि-तरंगें उस चक्र का शोधन करती हैं, उसकी सोई हुई पंखुड़ियों को खोल देती हैं और उसे जाग्रत करती हैं।





