विस्तृत उत्तर
साधना का परम लक्ष्य मृत्यु के भय का समूल नाश करना है।
जब साधक मृत्यु के सबसे घनीभूत रूप को सीधे अपनी चेतना का विषय बनाता है, तो वह अनुभव करता है कि मृत्यु केवल शरीर की है, आत्मा की नहीं।
वह अपने भीतर स्थित उस अविनाशी चैतन्य-तत्त्व का साक्षात्कार करता है, जो जन्म और मृत्यु से परे है।
इस साधना का यौगिक उद्देश्य कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत कर सहस्रार में स्थित परमशिव से उसका विलय कराना है, जो आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष की अवस्था है।





