विस्तृत उत्तर
यह साधना केवल उन साधकों के लिए है जो आध्यात्मिक रूप से एक विशेष अवस्था को प्राप्त कर चुके हैं और जिनमें लौकिक मान्यताओं से परे जाने का अदम्य साहस है।
शव-साधना किसी नौसिखिये के लिए भय पर विजय पाने का उपाय नहीं है, अपितु यह उस वीर साधक के लिए है जो ज्ञान के स्तर पर पहले ही शुद्ध-अशुद्ध के भेद से ऊपर उठ चुका है।
यह साधना उस साधक के अद्वैत-दर्शन की अंतिम और सबसे कठिन परीक्षा है, जहाँ उसे मृत्यु के साक्षात प्रतीक, शव में भी अपने आराध्य शिव का ही दर्शन करना होता है।





