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शास्त्र ज्ञान📜 माण्डूक्योपनिषद 1/7, केनोपनिषद 4/4, बृहदारण्यक 3/8/11, कठोपनिषद 2/24, छान्दोग्य 7/62 मिनट पठन

उपनिषद में ध्यान का महत्व क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

उपनिषदों में ध्यान ब्रह्म-साक्षात्कार की प्रत्यक्ष विधि है। छान्दोग्य (7/6) — 'ध्यानं वाव चित्तात्भूयः' — ध्यान चित्त से भी श्रेष्ठ है। माण्डूक्य में 'तुरीय' अवस्था ध्यान की परिणति है। कठोपनिषद (2/24) कहता है — आत्मा बुद्धि से नहीं, एकाग्र ध्यान से मिलती है।

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विस्तृत उत्तर

## उपनिषद में ध्यान का महत्व

उपनिषदों में ध्यान — ब्रह्म-साक्षात्कार का मार्ग

उपनिषदों में ध्यान (meditation) केवल मन की शांति का उपाय नहीं — वह ब्रह्म-साक्षात्कार की सीधी विधि है। बिना ध्यान के ब्रह्मज्ञान संभव नहीं।

माण्डूक्योपनिषद — तुरीय अवस्था

यह उपनिषद चेतना की चार अवस्थाएं बताता है:

  • जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति — तीनों में मन सक्रिय है
  • तुरीय — इन तीनों का साक्षी, निर्विकल्प अवस्था — यही शुद्ध ध्यान की परिणति है

*'प्रपञ्चोपशमं शान्तं शिवमद्वैतं चतुर्थं मन्यन्ते स आत्मा स विज्ञेयः।'* (7)

— शांत, कल्याणमय, अद्वैत चतुर्थ (तुरीय) ही आत्मा है — उसे जानना चाहिए। यही ध्यान का अंतिम फल है।

केनोपनिषद (4/4) — ध्यान का रहस्य

*'प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते।'*

— प्रत्येक बोध (अनुभव) में जो जाग्रत है — वही ब्रह्म है। ध्यान में इसी जाग्रत चेतना का साक्षात्कार होता है।

कठोपनिषद (2/24) — ध्यान की अनिवार्यता

*'नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन।'*

— आत्मा न प्रवचन से मिलती है, न बुद्धि से, न बहुत श्रवण से। वह केवल उसे ही प्राप्त होती है जिसे वह चुनती है — अर्थात जो एकाग्र ध्यान से उसकी ओर उन्मुख हो।

छान्दोग्य उपनिषद (7/6) — ध्यान सर्वश्रेष्ठ

*'ध्यानं वाव चित्तात्भूयः।'*

— ध्यान चित्त से भी श्रेष्ठ है। जो ध्यान करता है वह 'अहं ब्रह्मास्मि' का अनुभव करता है — वह संसार में स्वतंत्र विचरता है।

उपनिषदों में ध्यान के चरण

  1. 1इंद्रिय-संयम (प्रत्याहार)
  2. 2मन को ब्रह्म पर एकाग्र करना (धारणा)
  3. 3निरंतर एकाग्रता (ध्यान)
  4. 4ध्याता-ध्यान-ध्येय का एकत्व (समाधि)

ध्यान का अंतिम फल

बृहदारण्यक (3/8/11) — जो इस अक्षर ब्रह्म को जाने बिना इस लोक से जाता है, वह दीन है। जो जानकर जाता है — वह ब्रह्मवित् है।

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शास्त्रीय स्रोत
माण्डूक्योपनिषद 1/7, केनोपनिषद 4/4, बृहदारण्यक 3/8/11, कठोपनिषद 2/24, छान्दोग्य 7/6
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उपनिषद में ध्यान का महत्व क्या है — शास्त्रों के अनुसार

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