विस्तृत उत्तर
## उपनिषद में ध्यान का अभ्यास कैसे करें?
श्वेताश्वतर उपनिषद (2/8-15) — विस्तृत ध्यान-विधि
### चरण 1: उचित स्थान
एकांत, पवित्र स्थान — न अत्यंत ठंडा, न गर्म। नदी-तट, गुफा, या स्वच्छ कक्ष।
### चरण 2: उचित आसन
कुशा, मृगछाल या वस्त्र पर बैठें। रीढ़, गर्दन और सिर सीधे — एक रेखा में।
### चरण 3: इंद्रिय-संयम
*'धारणासु च योग्यतामाप्नोति।'*
— इंद्रियों को बाहरी विषयों से हटाकर भीतर लाएं। आँखें अर्ध-मुद्रित — नासिकाग्र पर या भ्रूमध्य पर स्थिर।
### चरण 4: प्राण-साधना
— श्वास को धीमा और नियमित करें। *'प्राणानां संनिरोधेन।'* — प्राण का नियंत्रण मन को स्वतः शांत करता है।
### चरण 5: ओम्-ध्यान (माण्डूक्योपनिषद)
*'ओमित्येवं ध्यायत आत्मानम्।'*
— 'ओम्' का मन में उच्चारण करते हुए आत्मा पर ध्यान करें। ओम् के अकार, उकार, मकार — तीन मात्राएं और फिर निर्ध्वनि तुरीय में विलीन हों।
### चरण 6: 'सोऽहम्' ध्यान
— श्वास लेते समय 'सो' (वह), छोड़ते समय 'हम्' (मैं) — 'मैं वही हूँ' — यह अनुभव ब्रह्म-चेतना का जागरण है।
### चरण 7: निर्विकल्प समाधि
*'यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि।'* (कठोपनिषद 6/10)
— इंद्रियाँ, मन और बुद्धि — सब स्थिर हो जाएं। इस अवस्था में ध्याता, ध्यान और ध्येय — तीनों एक हो जाते हैं।
श्वेताश्वतर (2/12-13) में ध्यान के संकेत
- ▸पहले — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश के प्रतीक अनुभव
- ▸फिर — आंतरिक प्रकाश का उदय
- ▸अंततः — ब्रह्म-दर्शन




