विस्तृत उत्तर
वेदों के बारे में 'किसने लिखे' और 'कब लिखे' — इन दोनों प्रश्नों पर शास्त्रीय और अकादमिक दृष्टिकोण भिन्न हैं।
शास्त्रीय/पारंपरिक दृष्टिकोण
- 1अपौरुषेय — वेदों को 'अपौरुषेय' (किसी मनुष्य द्वारा नहीं रचित) माना जाता है। वे ईश्वर की श्वास/वाणी हैं जो सृष्टि के आरंभ में प्रकट हुईं।
- 1ऋषि = श्रोता, रचयिता नहीं — वेद मंत्रों के ऋषि (जैसे विश्वामित्र, वशिष्ठ, अत्रि आदि) उन मंत्रों के द्रष्टा (देखने वाले/श्रोता) थे, लेखक नहीं। उन्होंने गहन ध्यान में इन मंत्रों का 'दर्शन' (साक्षात्कार) किया।
- 1वेदव्यास ने संकलन किया — वेदव्यास ने एक वेद को चार भागों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) में विभाजित और संकलित किया। इसीलिए उन्हें 'वेदव्यास' (वेदों का विभाजक) कहा जाता है। भागवत पुराण (1.4) में इसका विस्तृत वर्णन है।
- 1चार शिष्यों को सौंपा: पैल (ऋग्वेद), वैशंपायन (यजुर्वेद), जैमिनी (सामवेद), सुमंतु (अथर्ववेद)।
कब?
- ▸शास्त्रीय मान्यता: वेद सृष्टि के आदि से हैं — 'अनादि' (कोई आरंभ काल नहीं)।
- ▸अकादमिक अनुमान: ऋग्वेद की रचना लगभग 1500-1200 ई.पू. मानी जाती है (कुछ विद्वान इसे और प्राचीन 3000-5000 ई.पू. मानते हैं — इस पर विवाद है)।
- ▸वेद सबसे पहले मौखिक परंपरा (श्रुति) से गुरु-शिष्य परंपरा में प्रसारित हुए। लिखित रूप बहुत बाद में आया।
ध्यान दें: वेदों का काल निर्धारण अकादमिक जगत में आज भी विवादित है। यहाँ पारंपरिक और अकादमिक दोनों दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए हैं।





