मंत्र जप ज्ञानअजपा जप क्या होता है और कैसे करें?श्वास = स्वतः 'सोऽहम्' जप। अंदर='सो'(वह/ब्रह्म), बाहर='हम्'(मैं)। 21,600 श्वास/दिन = 21,600 जप। श्वास पर ध्यान = स्वतः। मानस से ऊपर। कोई नियम नहीं — सदा चल रहा। सिद्ध = मोक्ष।#अजपा#जप#श्वास
आत्मज्ञानतंत्र साधना से आत्मज्ञान कैसे मिलता है?तंत्र से आत्मज्ञान: प्रत्यभिज्ञा — 'मैं पहले से ही शिव हूँ।' 'सोऽहम्' श्वास में। कुंडलिनी सहस्रार = शिव-शक्ति मिलन। द्वैत विसर्जन। विज्ञान भैरव: 'यह तो मैं ही हूँ!' कुलार्णव: 'शिवभावेन पूजयेत्।'#आत्मज्ञान#प्रत्यभिज्ञा
ध्यान साधनाध्यान के दौरान कौन सा मंत्र जपें?ध्यान में सर्वश्रेष्ठ मंत्र ओम् है (माण्डूक्योपनिषद)। सोऽहम् — श्वास के साथ सबसे सरल। गायत्री — बुद्धि-शुद्धि के लिए। इष्टदेव-मंत्र — श्रद्धानुसार। गीता (10/25) — 'जपयज्ञोऽस्मि' — जप सर्वश्रेष्ठ यज्ञ है। गुरु-दीक्षित मंत्र का जप सर्वाधिक प्रभावशाली होता है।#मंत्र#ध्यान#ओम्
ध्यान साधनाध्यान के कितने प्रकार होते हैं?ध्यान के मुख्य प्रकार हैं — सगुण (इष्टदेव का ध्यान), निर्गुण (निराकार ब्रह्म), ओम्-नाद ध्यान, सोऽहम् ध्यान (श्वास के साथ), त्राटक, विपश्यना, चक्र-ध्यान और मंत्र-ध्यान। गीता (12/2-5) में सगुण ध्यान को नए साधकों के लिए सरल और श्रेष्ठ बताया गया है।#ध्यान#प्रकार#सगुण
शास्त्र ज्ञानउपनिषद में ध्यान का मार्ग क्या है?उपनिषदों में ध्यान के तीन मुख्य मार्ग हैं — ओम्-उपासना (माण्डूक्य), 'नेति नेति' — निराकरण मार्ग (बृहदारण्यक 4/3/32) और 'सोऽहम्' — प्राण-ध्यान। तुरीय अवस्था — शुद्ध साक्षी-चेतना — ध्यान की परिणति है जहाँ 'अयमात्मा ब्रह्म' का साक्षात्कार होता है।#ध्यान मार्ग#उपनिषद#ओम्
शास्त्र ज्ञानउपनिषद में ध्यान का अभ्यास कैसे करें?श्वेताश्वतर उपनिषद (2/8-15) में ध्यान की विधि है — एकांत स्थान, सीधा आसन, इंद्रिय-संयम, प्राण-नियंत्रण। माण्डूक्योपनिषद में 'ओम्' के चार मात्राओं का ध्यान। 'सोऽहम्' — श्वास के साथ ब्रह्म-चेतना का जागरण। कठोपनिषद (6/10) — इंद्रियाँ, मन और बुद्धि की पूर्ण स्थिरता ही समाधि है।#ध्यान#उपनिषद#अभ्यास