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दर्शन📜 ईशोपनिषद, हंसोपनिषद, विज्ञान भैरव तंत्र, योग दर्शन2 मिनट पठन

सोहम का अर्थ क्या है आध्यात्मिक रूप से?

संक्षिप्त उत्तर

सोऽहम् = 'वह (ब्रह्म) मैं हूँ।' अजपा मंत्र — हर श्वास में स्वतः गूंजता है (सो = श्वास अंदर, हम = बाहर)। अद्वैत अनुभव: आत्मा = ब्रह्म। उलटा = 'हंसः' — इसलिए ज्ञानी 'परमहंस'। ईशोपनिषद, हंसोपनिषद में वर्णित।

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विस्तृत उत्तर

'सोऽहम्' (सः + अहम्) एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक महावाक्य और ध्यान मंत्र है।

शाब्दिक अर्थ

  • सः = वह (ब्रह्म/परमात्मा)
  • अहम् = मैं
  • पूरा अर्थ: 'वह (परमात्मा) मैं हूँ' या 'मैं वही हूँ।'

यह 'तत्त्वमसि' (वह तू है) का ही पहले पुरुष में रूप है।

'अजपा जप' (Ajapa Japa)

  • सोहम को 'अजपा मंत्र' (बिना जपे जपने वाला मंत्र) भी कहा जाता है।
  • प्रत्येक श्वास में यह मंत्र स्वतः गूंजता है:
  • श्वास अंदर लेना (पूरक) = 'सो' (सः)
  • श्वास बाहर छोड़ना (रेचक) = 'हम्' (अहम्)
  • प्रत्येक मनुष्य प्रतिदिन ~21,600 बार श्वास लेता/छोड़ता है — अर्थात् अनजाने में 21,600 बार 'सोहम' का जप स्वतः होता है।

आध्यात्मिक अर्थ

  1. 1आत्मा = ब्रह्म — मेरे अंदर जो शुद्ध चेतना है, वही सर्वव्यापक ब्रह्म है।
  2. 2जीव-ईश्वर एकता — 'सोहम' अद्वैत का अनुभव है — जीवात्मा और परमात्मा एक ही हैं।
  3. 3हंस — 'सोहम' को उलटा पढ़ें = 'हंसः' (हंस)। परमहंस = जिसने 'सोहम' का बोध कर लिया। इसलिए उन्नत साधकों को 'परमहंस' कहा जाता है।

ध्यान विधि

  • शांत बैठें, आँखें बंद करें।
  • श्वास अंदर लेते हुए 'सो' और बाहर छोड़ते हुए 'हम्' का मानसिक जप करें।
  • धीरे-धीरे श्वास और मंत्र एक हो जाएँगे।

स्रोत: ईशोपनिषद (16), हंसोपनिषद, विज्ञान भैरव तंत्र (24)।

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शास्त्रीय स्रोत
ईशोपनिषद, हंसोपनिषद, विज्ञान भैरव तंत्र, योग दर्शन
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