विस्तृत उत्तर
'सोऽहम्' (सः + अहम्) एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक महावाक्य और ध्यान मंत्र है।
शाब्दिक अर्थ
- ▸सः = वह (ब्रह्म/परमात्मा)
- ▸अहम् = मैं
- ▸पूरा अर्थ: 'वह (परमात्मा) मैं हूँ' या 'मैं वही हूँ।'
यह 'तत्त्वमसि' (वह तू है) का ही पहले पुरुष में रूप है।
'अजपा जप' (Ajapa Japa)
- ▸सोहम को 'अजपा मंत्र' (बिना जपे जपने वाला मंत्र) भी कहा जाता है।
- ▸प्रत्येक श्वास में यह मंत्र स्वतः गूंजता है:
- ▸श्वास अंदर लेना (पूरक) = 'सो' (सः)
- ▸श्वास बाहर छोड़ना (रेचक) = 'हम्' (अहम्)
- ▸प्रत्येक मनुष्य प्रतिदिन ~21,600 बार श्वास लेता/छोड़ता है — अर्थात् अनजाने में 21,600 बार 'सोहम' का जप स्वतः होता है।
आध्यात्मिक अर्थ
- 1आत्मा = ब्रह्म — मेरे अंदर जो शुद्ध चेतना है, वही सर्वव्यापक ब्रह्म है।
- 2जीव-ईश्वर एकता — 'सोहम' अद्वैत का अनुभव है — जीवात्मा और परमात्मा एक ही हैं।
- 3हंस — 'सोहम' को उलटा पढ़ें = 'हंसः' (हंस)। परमहंस = जिसने 'सोहम' का बोध कर लिया। इसलिए उन्नत साधकों को 'परमहंस' कहा जाता है।
ध्यान विधि
- ▸शांत बैठें, आँखें बंद करें।
- ▸श्वास अंदर लेते हुए 'सो' और बाहर छोड़ते हुए 'हम्' का मानसिक जप करें।
- ▸धीरे-धीरे श्वास और मंत्र एक हो जाएँगे।
स्रोत: ईशोपनिषद (16), हंसोपनिषद, विज्ञान भैरव तंत्र (24)।





