ध्यान साधनाध्यान में जप ध्यान और मौन ध्यान में कौन प्रभावी है?दोनों प्रभावी — भिन्न स्तर। जप: सरल, सहारा=मंत्र, प्रारम्भिक/मध्यम, भक्ति+ऊर्जा। मौन: कठिन, कोई सहारा नहीं, उन्नत, गहनतम। क्रम: जप→मानसिक→मौन (प्राकृतिक)। विज्ञान भैरव: 'जो सूट करे वही।' सर्वोत्तम: जप से शुरू→मौन में प्रवेश→समाधि। दोनों=एक यात्रा।#जप ध्यान#मौन ध्यान#मानसिक जप
मंत्र साधनागायत्री मंत्र को मन में कैसे जपेंहोठ और जीभ को बिना हिलाए, आज्ञा चक्र पर सूर्य के प्रकाश का ध्यान करते हुए अर्थ की भावना के साथ मंत्र का स्मरण करना ही गायत्री मंत्र का मानसिक जप है।
शिव-नाग संयुक्त मंत्र (संपुट प्रयोग)रुद्र-सर्प संपुट क्या होता है?रुद्र-सर्प संपुट में एक क्रम होता है: महामृत्युंजय मंत्र + सर्प सूक्त (तीनों श्लोक) + महामृत्युंजय मंत्र — यह एक संपुट है। कालसर्प के लिए 11, 21 या 108 संपुट का पाठ करते हैं।#रुद्र सर्प संपुट#महामृत्युंजय#सर्प सूक्त
दक्षिणामूर्ति साधनामानसिक जप सबसे अच्छा क्यों है?मानसिक जप एकाग्रता बढ़ाता है और साधना के फल को गुप्त व सुरक्षित रखता है।#मानसिक जप#सर्वश्रेष्ठ#विधि
परंपरामासिक धर्म (Periods) में मंत्र जप की मनाही क्यों है और इसके क्या नियम हैंशारीरिक ऊर्जा के प्रवाह और शुद्धि के कारण बाह्य पूजा वर्जित है, लेकिन मानसिक जप किया जा सकता है।#पीरियड्स#नियम#ऊर्जा
जप नियमचलते-फिरते मंत्र जप करने के क्या नियम हैंचलते-फिरते केवल मानसिक जप करना चाहिए। यह निरंतर परमात्मा से जुड़े रहने का एक प्रभावी तरीका है।#नियम#अजपा जप#मानसिक जप
मंत्र साधनाक्या मंत्र जप बस या ट्रेन में बैठकर किया जा सकता है?हाँ — मानसिक जप (सर्वोत्तम, 1000 गुना फल) या उपांशु (बिना आवाज)। माला गोपनीय रखें। वाचिक (जोर से) सार्वजनिक स्थान पर अनुचित। शास्त्र: 'सर्वत्र सर्वदा शुद्धो मन्त्रजापो।' यात्रा का समय = जप का उत्तम उपयोग।#यात्रा जप#बस ट्रेन#मानसिक जप
ध्यान साधनाध्यान में जप ध्यान और मौन ध्यान में कौन प्रभावी है?दोनों प्रभावी — भिन्न स्तर। जप: सरल, सहारा=मंत्र, प्रारम्भिक/मध्यम, भक्ति+ऊर्जा। मौन: कठिन, कोई सहारा नहीं, उन्नत, गहनतम। क्रम: जप→मानसिक→मौन (प्राकृतिक)। विज्ञान भैरव: 'जो सूट करे वही।' सर्वोत्तम: जप से शुरू→मौन में प्रवेश→समाधि। दोनों=एक यात्रा।#जप ध्यान#मौन ध्यान#मानसिक जप
ध्यान साधनाध्यान और जप में क्या अंतर है?जप मंत्र की सक्रिय आवृत्ति है; ध्यान मन का शांत ठहराव। गीता (10/25) में जप को सर्वश्रेष्ठ यज्ञ कहा गया है। जप साधन है — जब जप गहरा होकर स्वतः रुक जाता है, तब ध्यान शुरू होता है। जप → मानसिक जप → अजपा-जप → ध्यान — यह क्रमिक यात्रा है।#ध्यान#जप#अंतर
मंत्र विधिवृद्ध व्यक्ति जो बोल नहीं सकते वे मंत्र जप कैसे करें?मानसिक जप = सर्वोत्तम ('मानसं सर्वतो वरम्')। श्रवण (सुनना) = भक्ति प्रथम प्रकार। लिखित जप (हाथ चले तो)। माला स्पर्श + मन में मंत्र। ध्यान (देवता चित्रण)। दूसरों द्वारा संकल्प जप। भगवान भाव देखते, वाणी नहीं।#वृद्ध#बोल नहीं सकते#मानसिक जप
मंत्र विधिमूक व्यक्ति मंत्र जप कैसे कर सकता है?मानसिक जप = सर्वश्रेष्ठ ('मानसं सर्वतो वरम्')। लिखित जप (हाथ चलें तो)। माला स्पर्श + मन में मंत्र। ध्यान (देवता रूप)। श्रवण (सुनना = भक्ति प्रथम)। भगवान भाव देखते — वाणी नहीं।#मूक#बोल नहीं सकते#मानसिक जप