विस्तृत उत्तर
मूक (बोलने में असमर्थ) व्यक्ति के लिए शास्त्रों में स्पष्ट विकल्प हैं:
1मानसिक जप (सर्वश्रेष्ठ)
मानसं सर्वतो वरम्' — मानसिक जप सभी प्रकार के जप में सर्वोत्तम। मन ही मन मंत्र दोहराना = वाचिक जप से भी श्रेष्ठ। मूक व्यक्ति का मानसिक जप = पूर्णतः मान्य और शक्तिशाली।
2लिखित जप
यदि हाथ कार्य करते हैं — राम नाम / 'ॐ नमः शिवाय' बार-बार लिखना = शक्तिशाली जप। तीन इन्द्रियां (हाथ + आंख + मन) एक साथ सक्रिय।
3माला स्पर्श + मानसिक जप
माला के मनके छूते हुए मन में मंत्र = स्पर्श + मानसिक = प्रभावी।
4ध्यान
इष्ट देवता का ध्यान = जप के समकक्ष। नेत्र बंद कर देवता का रूप मन में।
5श्रवण
मंत्र/भजन सुनना = भागवत में श्रवण = भक्ति का प्रथम प्रकार।
6संकेत भाषा (Sign Language)
आधुनिक विकल्प — मुद्राओं से भगवान की स्तुति।
शास्त्रीय सिद्धांत: भगवान भाव देखते हैं, वाणी नहीं। 'मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं...परिपूर्णं तदस्तु मे।' गूंगा भक्त भी भाव से भगवान प्राप्त कर सकता है — शबरी ने जूठे बेर खिलाए, भगवान ने भाव देखा।





