विस्तृत उत्तर
मासिक धर्म के दौरान शारीरिक ऊर्जा का प्रवाह नीचे की ओर (अपान वायु) होता है, जबकि मंत्र जप से ऊर्जा ऊपर की ओर (प्राण वायु) बढ़ती है, जिससे शारीरिक और मानसिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसी वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण से इस दौरान मंदिर जाने या मूर्तियों को स्पर्श करने की मनाही है। हालांकि, शास्त्रों में 'मानसिक जप' पर कोई प्रतिबंध नहीं है। महिलाएँ इस दौरान मन ही मन अपने इष्ट का स्मरण कर सकती हैं। भगवान का नाम 'देह' से नहीं 'आत्मा' से जुड़ा है, और आत्मा हमेशा पवित्र रहती है। इसलिए मानसिक रूप से जप करना पूर्णतः अनुचित नहीं है।





