ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
मंत्र साधना📜 तंत्र शास्त्र, योग विज्ञान, साधना अनुभव2 मिनट पठन

मंत्र जप करते समय पसीना आने का क्या कारण है

संक्षिप्त उत्तर

जप में पसीना: (1) ऊर्जा जागृति — प्राणशक्ति ताप = शुभ संकेत। (2) तप = ताप, पाप जलना। (3) शरीर शुद्धि — अशुद्धि बाहर। व्यावहारिक: एकाग्रता → तापमान वृद्धि, प्राणायाम। सामान्य और शुभ — जप जारी रखें। अत्यधिक हो तो विश्राम + जल।

📖

विस्तृत उत्तर

मंत्र जप के दौरान पसीना आना एक सामान्य अनुभव है। इसके शास्त्रीय और व्यावहारिक दोनों कारण हैं।

शास्त्रीय/आध्यात्मिक कारण

1ऊर्जा जागृति

मंत्र जप से शरीर में सूक्ष्म ऊर्जा (प्राणशक्ति/कुण्डलिनी) जागृत होती है। यह ऊर्जा शरीर में ताप उत्पन्न करती है — पसीना उसी ताप का परिणाम। यह शुभ संकेत माना जाता है — साधना प्रभावी हो रही है।

2तप

तप' = ताप/गर्मी। मंत्र जप = तप (तपस्या)। तप से शरीर में ऊष्मा = पसीना। यह पापों/अशुद्धियों के जलने का प्रतीक।

3शरीर शुद्धि

मान्यता: पसीने के माध्यम से शरीर की सूक्ष्म अशुद्धियाँ और नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है = शरीर शुद्ध हो रहा है।

व्यावहारिक कारण

  • गहन एकाग्रता से शरीर का तापमान बढ़ता है।
  • प्राणायाम/श्वास नियन्त्रण से शरीर में ऑक्सीजन परिसंचरण बढ़ता है।
  • बन्द कमरे, गर्म मौसम, ऊनी आसन = बाह्य कारण।

क्या करें

  • घबराएँ नहीं — यह सामान्य और शुभ है।
  • जप जारी रखें।
  • पानी पास रखें (जप के बाद पिएँ)।
  • हवादार स्थान चुनें।
  • यदि अत्यधिक पसीना/चक्कर आए तो रुकें, जल पिएँ।
📜
शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, योग विज्ञान, साधना अनुभव
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

मंत्र जपपसीनाऊर्जासाधना

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

मंत्र जप करते समय पसीना आने का क्या कारण है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको मंत्र साधना से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर तंत्र शास्त्र, योग विज्ञान, साधना अनुभव पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।