विस्तृत उत्तर
मंत्र जप के दौरान पसीना आना एक सामान्य अनुभव है। इसके शास्त्रीय और व्यावहारिक दोनों कारण हैं।
शास्त्रीय/आध्यात्मिक कारण
1ऊर्जा जागृति
मंत्र जप से शरीर में सूक्ष्म ऊर्जा (प्राणशक्ति/कुण्डलिनी) जागृत होती है। यह ऊर्जा शरीर में ताप उत्पन्न करती है — पसीना उसी ताप का परिणाम। यह शुभ संकेत माना जाता है — साधना प्रभावी हो रही है।
2तप
तप' = ताप/गर्मी। मंत्र जप = तप (तपस्या)। तप से शरीर में ऊष्मा = पसीना। यह पापों/अशुद्धियों के जलने का प्रतीक।
3शरीर शुद्धि
मान्यता: पसीने के माध्यम से शरीर की सूक्ष्म अशुद्धियाँ और नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है = शरीर शुद्ध हो रहा है।
व्यावहारिक कारण
- ▸गहन एकाग्रता से शरीर का तापमान बढ़ता है।
- ▸प्राणायाम/श्वास नियन्त्रण से शरीर में ऑक्सीजन परिसंचरण बढ़ता है।
- ▸बन्द कमरे, गर्म मौसम, ऊनी आसन = बाह्य कारण।
क्या करें
- ▸घबराएँ नहीं — यह सामान्य और शुभ है।
- ▸जप जारी रखें।
- ▸पानी पास रखें (जप के बाद पिएँ)।
- ▸हवादार स्थान चुनें।
- ▸यदि अत्यधिक पसीना/चक्कर आए तो रुकें, जल पिएँ।





