विस्तृत उत्तर
श्रोताओं की दिशा वक्ता की दिशा से जुड़ी बताई गई है। यदि वक्ता उत्तरमुख बैठा है, तो श्रोताओं को पूर्वमुख बैठना चाहिए। यदि वक्ता पूर्वमुख है, तो श्रोताओं को उत्तरमुख बैठना चाहिए। अथवा वक्ता और श्रोता दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं। यह नियम देस-काल को जानने वाले महानुभावों द्वारा बताया गया है। इससे पता चलता है कि भागवत सप्ताह केवल कथा सुनने की सभा नहीं, बल्कि विधिपूर्वक आयोजित अनुष्ठान है। श्रोताओं के लिये आसन पहले तैयार करना, वक्ता के लिये दिव्य सिंहासन रखना और दिशा का ध्यान रखना, ये सब कथा में श्रद्धा और व्यवस्था के अंग हैं।
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