विस्तृत उत्तर
गणेश मंत्र जप की संख्या उद्देश्य और परिस्थिति के अनुसार निर्धारित होती है:
नित्य साधना
- ▸न्यूनतम: 108 बार (1 माला) — प्रतिदिन
- ▸मध्यम: 1008 बार (11 माला) — बुधवार और चतुर्थी को
- ▸उत्तम: 10,008 बार (108 माला) — गणेश चतुर्थी महापर्व पर
पुरश्चरण (मंत्र सिद्धि)
- ▸लघु पुरश्चरण: 1,25,000 (सवा लाख) जप — 40-50 दिन में
- ▸मध्यम पुरश्चरण: 5,00,000 (पाँच लाख) जप
- ▸पूर्ण पुरश्चरण: 10,00,000 (दस लाख) जप
विशेष परिस्थितियों में जप
- ▸संकट में: 1008 बार (उसी दिन)
- ▸कार्य सिद्धि: 21 दिन × 108 = 2268 जप
- ▸परीक्षा/विद्या: 40 दिन × 108 = 4320 जप
- ▸व्यापार वृद्धि: शुक्ल पक्ष चतुर्थी से 21 चतुर्थी × 108
संकष्टी चतुर्थी (मासिक)
प्रत्येक कृष्ण पक्ष चतुर्थी को 1008 बार मंत्र जप का विधान है।
गणेश चतुर्थी (वार्षिक महापर्व)
10 दिनों में कुल जप:
- ▸प्रतिदिन 1008 × 10 = 10,080 जप (आदर्श)
जप के नियम
- 1एक बार जप संख्या निर्धारित करें — प्रतिदिन घटाएं नहीं
- 2सूतक-पातक में जप बंद न करें — मानसिक जप करें
- 3माला पूर्ण होने पर 'सुमेरु' न लांघें
- 4जप के बाद माला को गणेश जी को समर्पित करें
दशांश हवन
पुरश्चरण पूर्ण होने पर कुल जप का 1/10 हवन करें:
- ▸हवन सामग्री: तिल, दूर्वा, घी, मोदक
- ▸मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः स्वाहा'
गणेश पुराण का वचन
> 'सहस्रवारं यः पठेद् गणपतिस्तोत्रम् अनन्यमानसः।
> स सर्वसिद्धिं आप्नोति लभते च मनोरथम्॥'
— जो एकाग्र मन से 1000 बार गणपति स्तोत्र पाठ करता है, वह सर्वसिद्धि और मनोरथ प्राप्त करता है।





