विस्तृत उत्तर
शिव पुराण और तंत्र ग्रंथों के अनुसार शिव मंत्र जप के श्रेष्ठ समय:
सर्वश्रेष्ठ समय
- 1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-6 बजे) — सर्वोत्तम; इस समय वातावरण शुद्ध और मन एकाग्र रहता है; शिव पुराण में इसे 'शिवकाल' कहा गया है
- 1प्रदोष काल (सूर्यास्त के 1.5 घंटे बाद तक) — विशेष फलदायी; प्रतिमाह त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है
- 1निशीथ काल (अर्धरात्रि — रात्रि 12 बजे) — तांत्रिक साधना के लिए श्रेष्ठ; शिव का यह प्रिय काल है
- 1सोमवार — सोमवार को किया गया जप विशेष फलदायी
- 1महाशिवरात्रि रात्रि — वर्ष का सर्वोत्तम जप काल
नियमित दिनचर्या में
- ▸प्रातःकाल स्नान के बाद
- ▸मध्यान्ह पूजा के समय
- ▸सायंकाल संध्या के समय
वर्जित समय
- ▸भोजन के तुरंत बाद न करें
- ▸अपवित्र अवस्था में न करें
- ▸मन विचलित हो तो पहले श्वास नियंत्रण करें
विशेष: सावन माह के प्रत्येक दिन किया गया जप विशेष महत्व का है — 'श्रावणे माधवे मासि शिवपूजा विशेषतः' (स्कंद पुराण)।





