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साधना विधि📜 शिव पुराण - विद्येश्वर संहिता, तंत्र शास्त्र2 मिनट पठन

शिव मंत्र जप का सही समय क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

शिव मंत्र जप के लिए ब्रह्ममुहूर्त (4-6 बजे प्रातः) सर्वश्रेष्ठ है। प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) और अर्धरात्रि भी शिव जी को प्रिय है। सोमवार और सावन माह में जप का विशेष महत्व है।

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विस्तृत उत्तर

शिव पुराण और तंत्र ग्रंथों के अनुसार शिव मंत्र जप के श्रेष्ठ समय:

सर्वश्रेष्ठ समय

  1. 1ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-6 बजे) — सर्वोत्तम; इस समय वातावरण शुद्ध और मन एकाग्र रहता है; शिव पुराण में इसे 'शिवकाल' कहा गया है
  1. 1प्रदोष काल (सूर्यास्त के 1.5 घंटे बाद तक) — विशेष फलदायी; प्रतिमाह त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है
  1. 1निशीथ काल (अर्धरात्रि — रात्रि 12 बजे) — तांत्रिक साधना के लिए श्रेष्ठ; शिव का यह प्रिय काल है
  1. 1सोमवार — सोमवार को किया गया जप विशेष फलदायी
  1. 1महाशिवरात्रि रात्रि — वर्ष का सर्वोत्तम जप काल

नियमित दिनचर्या में

  • प्रातःकाल स्नान के बाद
  • मध्यान्ह पूजा के समय
  • सायंकाल संध्या के समय

वर्जित समय

  • भोजन के तुरंत बाद न करें
  • अपवित्र अवस्था में न करें
  • मन विचलित हो तो पहले श्वास नियंत्रण करें

विशेष: सावन माह के प्रत्येक दिन किया गया जप विशेष महत्व का है — 'श्रावणे माधवे मासि शिवपूजा विशेषतः' (स्कंद पुराण)।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण - विद्येश्वर संहिता, तंत्र शास्त्र
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