विस्तृत उत्तर
काली साधना हिंदू तंत्र परंपरा की सर्वोच्च और सर्वाधिक शक्तिशाली साधनाओं में से एक है। यह साधना भक्ति मार्ग और तंत्र मार्ग — दोनों में की जाती है।
साधना के दो प्रकार
1भक्ति मार्ग (गृहस्थों के लिए उपयुक्त)
सरल, सात्विक पूजा-उपासना जिसमें काली माँ की प्रतिमा या चित्र के सामने भक्ति भाव से पूजन और मंत्र जप किया जाता है।
2तांत्रिक साधना (दीक्षित साधकों के लिए)
यह उच्च स्तरीय साधना है जो केवल सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन में की जाती है।
भक्ति मार्ग से काली साधना की विधि
समय: दीपावली की रात्रि, अमावस्या, अर्धरात्रि (रात 12 बजे)
सामग्री
- ▸काली माँ की प्रतिमा या चित्र (दक्षिणकाली स्वरूप)
- ▸काले तिल का तेल या सरसों का तेल का दीप
- ▸लाल गुड़हल के फूल
- ▸नीले कमल (यदि उपलब्ध हो)
- ▸सिंदूर
- ▸नारियल
- ▸मदिरा (तांत्रिक परंपरा) या नारियल जल (सात्विक)
- ▸खीर या मिठाई
क्रमिक विधि
- 1स्नान और शुद्धि: रात्रि में स्नान करके काले या नीले वस्त्र धारण करें (तांत्रिक परंपरा में) या लाल वस्त्र (सात्विक में)
- 1आसन: दक्षिण मुख करके बैठें — काली माँ दक्षिण दिशा की अधिष्ठात्री हैं (यमराज की दिशा पर विजय का प्रतीक)
- 1दीप प्रज्वलन: सरसों या तिल तेल का दीप जलाएं
- 1देवी आह्वान:
> ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा॥
- 1ध्यान श्लोक:
> करालवदनां घोरां मुक्तकेशीं चतुर्भुजाम्।
> कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुंडमालाविभूषिताम्॥
- 1पुष्प, सिंदूर और नारियल अर्पण
- 1मंत्र जप: 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' — 108 बार
- 1भोग: खीर, मिठाई या नारियल जल
- 1आरती और क्षमा प्रार्थना
महत्वपूर्ण: बिना गुरु दीक्षा के उच्च तांत्रिक साधना आरंभ न करें।





