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साधना विधि📜 तंत्र शास्त्र, देवी भागवत पुराण, दुर्गा सप्तशती2 मिनट पठन

दुर्गा मंत्र जप कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

लाल आसन पर पूर्व/उत्तर मुख करके बैठें, रुद्राक्ष माला से नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे) या 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का 108 बार जप करें। तर्जनी माला को न छुए। नवरात्रि में 1008 बार जप विशेष फलदायी है।

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विस्तृत उत्तर

दुर्गा मंत्र जप की शास्त्रोक्त विधि तंत्र शास्त्र और देवी भागवत में वर्णित है:

प्रमुख दुर्गा मंत्र

  1. 1नवार्ण मंत्र (सर्वश्रेष्ठ):

> ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे

  1. 1दुर्गा मूल मंत्र:

> ॐ दुं दुर्गायै नमः

  1. 1दुर्गा गायत्री:

> ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारि धीमहि। तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्॥

जप विधि

पूर्व तैयारी

  1. 1स्नान करके लाल या पीत वस्त्र धारण करें
  2. 2लाल आसन (लाल कंबल या कपड़ा) पर बैठें
  3. 3पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करें
  4. 4लाल चंदन या गुड़हल का दीप जलाएं
  5. 5रुद्राक्ष या स्फटिक माला तैयार रखें

जप विधि

  1. 1संकल्प: मन में उद्देश्य बोलें
  2. 2गुरु स्मरण: अपने गुरु या आदि शंकराचार्य का स्मरण करें
  3. 3देवी ध्यान:

> या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।

> नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

  1. 1माला जप: अनामिका और अंगूठे से माला पकड़ें; तर्जनी का स्पर्श न हो
  2. 2उच्चारण: मन में या धीमी आवाज में
  3. 3जप के बाद: माला को सिर से लगाएं और देवी को समर्पित करें

जप संख्या

  • नित्य साधना: 108 बार (1 माला)
  • विशेष पूजा: 1008 बार (11 माला)
  • अनुष्ठान: 1,25,000 बार (सवा लाख)

नवरात्रि में: प्रतिदिन न्यूनतम 108 बार जप करें और यदि संभव हो तो 1008 बार।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, देवी भागवत पुराण, दुर्गा सप्तशती
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