विस्तृत उत्तर
हनुमान साधना वैष्णव और शाक्त — दोनों परंपराओं में की जाती है। हनुमान पुराण में इसका विस्तृत वर्णन है:
साधना के प्रकार
- 1भक्ति साधना (सर्वोत्तम और सरल):
हनुमान जी के लिए भक्ति सर्वोच्च साधना है।
- 1तांत्रिक साधना (गुरु दीक्षा आवश्यक):
पंचमुखी हनुमान साधना — उच्च स्तरीय तांत्रिक अनुष्ठान।
सामान्य हनुमान साधना विधि
शुभ समय
- ▸मंगलवार या शनिवार से प्रारंभ करें
- ▸चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती) — वर्ष का सर्वोत्तम
- ▸ब्रह्ममुहूर्त — प्रातः 4-6 बजे
सामग्री
- ▸हनुमान जी की मूर्ति या चित्र (सिंदूरी रंग)
- ▸सिंदूर
- ▸चमेली के तेल का दीप
- ▸लाल पुष्प — गुड़हल
- ▸गुड़-चना
- ▸लाल वस्त्र
विधि
- 1स्नान और वस्त्र: ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करके ब्रह्मचर्य का संकल्प लें।
- 1आसन: लाल आसन पर पूर्व या दक्षिण मुख करके बैठें — हनुमान जी दक्षिण दिशा के रक्षक हैं।
- 1दीप: चमेली के तेल का दीप जलाएं।
- 1हनुमान जी का ध्यान:
> मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेंद्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
> वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
- 1सिंदूर अर्पण: हनुमान जी को सिंदूर का चोला अर्पित करें।
- 1पंचोपचार पूजन: जल, चंदन, पुष्प, धूप, दीप।
- 1मंत्र जप:
> 'ॐ हं हनुमते नमः' — 108 बार (रुद्राक्ष माला)
- 1हनुमान चालीसा: एक बार पाठ।
- 1सुंदरकांड: यदि संभव हो तो पाठ करें — सर्वोत्तम साधना।
- 1भोग: गुड़-चना और लड्डू।
- 1आरती: 'जय हनुमान ज्ञान गुण सागर...'।
21 दिन की विशेष साधना
- ▸21 मंगलवार या 21 शनिवार लगातार
- ▸प्रतिदिन 108 बार मंत्र जप
- ▸हनुमान चालीसा का 3 बार पाठ
- ▸21वें दिन हवन: 'ॐ हं हनुमते नमः स्वाहा'
पंचमुखी हनुमान साधना
हनुमान के 5 मुख (हनुमान, नरसिंह, गरुड़, वराह, हयग्रीव) पाँच दिशाओं की रक्षा करते हैं। यह उच्च तांत्रिक साधना है — गुरु दीक्षा के बाद करें।
साधना का फल
हनुमान पुराण: 'जो हनुमान की उपासना करता है, उसे किसी से भय नहीं। राम और हनुमान दोनों की कृपा मिलती है।'





