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साधना विधि📜 शिव पुराण, तंत्र शास्त्र, ज्योतिष परंपरा2 मिनट पठन

महामृत्युंजय मंत्र कितनी बार जप करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

नित्य साधना के लिए 108 बार (1 माला) पर्याप्त है। रोग निवारण या विशेष अनुष्ठान के लिए सवा लाख (1,25,000) जप का पुरश्चरण किया जाता है। सोमवार को 1008 जप का विशेष महत्व है।

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विस्तृत उत्तर

महामृत्युंजय मंत्र की जप संख्या उद्देश्य और परिस्थिति के अनुसार निर्धारित होती है:

नित्य साधना

  • न्यूनतम: 108 बार प्रतिदिन (1 माला)
  • मध्यम: 1008 बार (11 माला)
  • उत्तम: 10,008 बार (108 माला — एकादशी या शिवरात्रि को)

अनुष्ठान (पुरश्चरण)

  • लघु अनुष्ठान: 1,25,000 (सवा लाख) — 40 दिन में
  • पूर्ण पुरश्चरण: 5,00,000 (पाँच लाख)
  • रोग निवारण: 1,25,000 (सवा लाख) — यह सर्वाधिक प्रचलित है

ज्योतिष अनुसार

  • ग्रह दोष निवारण: 1,25,000
  • महादशा/अंतर्दशा में: 11,000 प्रतिदिन
  • मृत्युतुल्य संकट: 1,25,000 अनुष्ठान

सामान्य नियम

  • एक बार जप शुरू करें तो प्रतिदिन की संख्या न घटाएं
  • माला पूरी होने पर 'सुमेरु मनका' (मुख्य मनका) न लांघें — माला पलटकर वापस आएं
  • सूतक-पातक में जप न छोड़ें — बाधा आने पर संख्या को दूसरे दिन पूरा करें

आचार्यों का मत: अनंत स्वामी के अनुसार — 'नित्य 108 जप + सोमवार को 1008 जप' — यह सर्वसुलभ विधि है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, तंत्र शास्त्र, ज्योतिष परंपरा
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