विस्तृत उत्तर
महामृत्युंजय मंत्र की जप संख्या उद्देश्य और परिस्थिति के अनुसार निर्धारित होती है:
नित्य साधना
- ▸न्यूनतम: 108 बार प्रतिदिन (1 माला)
- ▸मध्यम: 1008 बार (11 माला)
- ▸उत्तम: 10,008 बार (108 माला — एकादशी या शिवरात्रि को)
अनुष्ठान (पुरश्चरण)
- ▸लघु अनुष्ठान: 1,25,000 (सवा लाख) — 40 दिन में
- ▸पूर्ण पुरश्चरण: 5,00,000 (पाँच लाख)
- ▸रोग निवारण: 1,25,000 (सवा लाख) — यह सर्वाधिक प्रचलित है
ज्योतिष अनुसार
- ▸ग्रह दोष निवारण: 1,25,000
- ▸महादशा/अंतर्दशा में: 11,000 प्रतिदिन
- ▸मृत्युतुल्य संकट: 1,25,000 अनुष्ठान
सामान्य नियम
- ▸एक बार जप शुरू करें तो प्रतिदिन की संख्या न घटाएं
- ▸माला पूरी होने पर 'सुमेरु मनका' (मुख्य मनका) न लांघें — माला पलटकर वापस आएं
- ▸सूतक-पातक में जप न छोड़ें — बाधा आने पर संख्या को दूसरे दिन पूरा करें
आचार्यों का मत: अनंत स्वामी के अनुसार — 'नित्य 108 जप + सोमवार को 1008 जप' — यह सर्वसुलभ विधि है।





