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मंत्र सिद्धि📜 मंत्रमहार्णव (पुरश्चरण अध्याय), कुलार्णव तंत्र (15.68-72), शारदातिलक तंत्र, अग्निपुराण, रुद्रयामल तंत्र2 मिनट पठन

मंत्र सिद्धि के लिए कितने जप करने पड़ते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

पुरश्चरण = अक्षर-संख्या × 1 लाख जप। उदाहरण: 'ॐ नमः शिवाय' (6 अक्षर) = 6 लाख जप। साथ में: हवन (10वाँ), तर्पण, मार्जन, ब्राह्मण भोजन। खंड-पुरश्चरण (40-90 दिन में विभाजित) भी स्वीकार्य। रुद्रयामल: केवल संख्या से नहीं — भाव से सिद्धि।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र-सिद्धि के लिए जप-संख्या की शास्त्रोक्त गणना और विधान:

पुरश्चरण — मंत्रमहार्णव का विधान

मंत्राक्षरेण लक्षं तु जपेत् पुरश्चरे क्रमात्।

— पुरश्चरण में मंत्र के प्रत्येक अक्षर के लिए एक लाख जप करना पड़ता है।

मंत्र-अनुसार पुरश्चरण संख्या

| मंत्र | अक्षर संख्या | पुरश्चरण जप |

|---|---|---|

| ॐ | 1 | 1,00,000 |

| ह्रीं | 1 बीज | 1,00,000 |

| ॐ नमः शिवाय | 6 | 6,00,000 |

| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय | 12 | 12,00,000 |

| गायत्री मंत्र | 24 | 24,00,000 |

*नोट: अक्षर-गणना की विधि परंपरा-अनुसार भिन्न हो सकती है। गुरु से सुनिश्चित करें।*

पुरश्चरण का पूर्ण विधान (कुलार्णव 15.68)

मुख्य जप के साथ:

  • हवन: जप का 10वाँ भाग (10 हवन प्रति 100 जप)
  • तर्पण: हवन का 10वाँ भाग
  • मार्जन: तर्पण का 10वाँ भाग
  • ब्राह्मण भोजन: मार्जन का 10वाँ भाग

अर्थात् 10 लाख जप होने पर → 1 लाख आहुति → 10,000 तर्पण → 1,000 मार्जन → 100 ब्राह्मण भोजन।

व्यावहारिक दृष्टि

शारदातिलक: यदि पुरश्चरण एक बार में संभव न हो — खंड-पुरश्चरण भी होता है:

  • 40 दिन, 90 दिन, 6 माह — इस प्रकार विभाजित करके।
  • गुरु के मार्गदर्शन में खंड-पुरश्चरण स्वीकार्य है।

रुद्रयामल — एक महत्वपूर्ण तथ्य

संख्या मात्रेण नो सिद्धिः भावेन सिद्धिर्जायते।

— केवल संख्या पूरी करने से सिद्धि नहीं — भाव की शुद्धता और गुरु-कृपा के साथ संख्या हो तो सिद्धि।

सरल मार्ग

नित्य 108 जप → अनुशासित जीवन → भाव-शुद्धि — यह 'करोड़ों' यांत्रिक जप से श्रेष्ठ है।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्रमहार्णव (पुरश्चरण अध्याय), कुलार्णव तंत्र (15.68-72), शारदातिलक तंत्र, अग्निपुराण, रुद्रयामल तंत्र
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