विस्तृत उत्तर
मंत्र-सिद्धि के लिए जप-संख्या की शास्त्रोक्त गणना और विधान:
पुरश्चरण — मंत्रमहार्णव का विधान
मंत्राक्षरेण लक्षं तु जपेत् पुरश्चरे क्रमात्।
— पुरश्चरण में मंत्र के प्रत्येक अक्षर के लिए एक लाख जप करना पड़ता है।
मंत्र-अनुसार पुरश्चरण संख्या
| मंत्र | अक्षर संख्या | पुरश्चरण जप |
|---|---|---|
| ॐ | 1 | 1,00,000 |
| ह्रीं | 1 बीज | 1,00,000 |
| ॐ नमः शिवाय | 6 | 6,00,000 |
| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय | 12 | 12,00,000 |
| गायत्री मंत्र | 24 | 24,00,000 |
*नोट: अक्षर-गणना की विधि परंपरा-अनुसार भिन्न हो सकती है। गुरु से सुनिश्चित करें।*
पुरश्चरण का पूर्ण विधान (कुलार्णव 15.68)
मुख्य जप के साथ:
- ▸हवन: जप का 10वाँ भाग (10 हवन प्रति 100 जप)
- ▸तर्पण: हवन का 10वाँ भाग
- ▸मार्जन: तर्पण का 10वाँ भाग
- ▸ब्राह्मण भोजन: मार्जन का 10वाँ भाग
अर्थात् 10 लाख जप होने पर → 1 लाख आहुति → 10,000 तर्पण → 1,000 मार्जन → 100 ब्राह्मण भोजन।
व्यावहारिक दृष्टि
शारदातिलक: यदि पुरश्चरण एक बार में संभव न हो — खंड-पुरश्चरण भी होता है:
- ▸40 दिन, 90 दिन, 6 माह — इस प्रकार विभाजित करके।
- ▸गुरु के मार्गदर्शन में खंड-पुरश्चरण स्वीकार्य है।
रुद्रयामल — एक महत्वपूर्ण तथ्य
संख्या मात्रेण नो सिद्धिः भावेन सिद्धिर्जायते।
— केवल संख्या पूरी करने से सिद्धि नहीं — भाव की शुद्धता और गुरु-कृपा के साथ संख्या हो तो सिद्धि।
सरल मार्ग
नित्य 108 जप → अनुशासित जीवन → भाव-शुद्धि — यह 'करोड़ों' यांत्रिक जप से श्रेष्ठ है।





