विस्तृत उत्तर
मंत्र में 'रोग काटो' का स्पष्ट उल्लेख है। यदि कोई व्यक्ति गंभीर रोग से पीड़ित है, तो साधक को मंत्र का जप करते हुए शिव लिंग पर जल या दूध चढ़ाने के बाद उस प्रसाद को रोगी को ग्रहण कराना चाहिए। लोक-परंपराओं में, रोग निवारण के लिए मंत्र से अभिमंत्रित भस्म (राख) को रोगी के माथे पर लगाने का भी विधान पाया जाता है। रोग और दारिद्र्य को नष्ट करने के लिए दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र को भी त्रिसंध्या (सुबह, दोपहर, शाम) पढ़ने की सलाह दी जाती है।





