का सरल उत्तर
न्यास से साधक का शरीर मंत्रमय और पवित्र होता है — इससे देवता की शक्तियाँ अंगों पर स्थापित होती हैं, विघ्न दूर रहते हैं और उग्र रूप के दर्शन नहीं होते।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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