विस्तृत उत्तर
शाबर मंत्रों की एक विशिष्ट संरचना होती है, जिसमें 'ईश्वर वाचा' और अंत में 'दुहाई', 'आन' या 'सौगंध' जैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं। ये शब्द उस शक्ति (जैसे शंकर या गोरखनाथ) को त्वरित कार्य करने के लिए बाध्य या प्रेरित करते हैं। जब 'भंडार भरण शंकर शाबर मंत्र' में कहा जाता है: 'न करो तो तो को राजा राम की दुहाई,' तो यह भगवान शिव को मर्यादा पुरुषोत्तम राजा राम की शपथ देकर, अपने भक्तों का कार्य तुरंत सिद्ध करने की तीव्र और सहज प्रार्थना है। यह तंत्र में अनिवार्य रूप से कार्य सिद्ध करने का एक शक्तिशाली मनोवैज्ञानिक और ऊर्जात्मक उपकरण है।





