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विस्तृत उत्तर
तारा यंत्र की संरचना:
— केंद्र में एक बिंदु।
— बिंदु के चारों ओर एक उल्टा त्रिकोण (शक्ति का प्रतीक)।
— फिर एक वृत्त।
— अष्टदल कमल।
— सबसे बाहर भूपुर (वर्गाकार आकृति)।
स्थापना विधि:
— यंत्र को पूर्व दिशा में पश्चिम की ओर मुख करके स्थापित करना चाहिए।
— स्थापना से पूर्व यंत्र को जल, दूध, शहद, पंचामृत और शक्कर से अभिषेक करने का विधान है।
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